" तफिश-ए-इश्क़ ।"

वह काले कोयले की ही तफिश थी ,
जिसके बदौलत हीरे की चमक बाबुलंद है ।
दिलों के पेचीदा राज़ को समझ सको ,
तब मालूम हो कौन बेवक़ूफ़ ,कौन अक्लमंद है ।
- शाहीर रफ़ी

दिल के राज़ जानने के लिए ,ईल्म-ए-नुजूम का होना लाज़मी नहीं ,बस निग़ाह-ए-नाज़ में वह सादतमंदी होनी चाहिए ,जो दिल के पोशीदा राज़ को पढ़ पाए ।जो इंसान तुलु-ए-इश्क़ को एक बूँद समझता है ,वह यह नहीं जानता की यही तलब आगे चलकर एक अज़ीम-ओ-शान,
मिस्ल-ए-दर्या में तब्दील होने वाली है ।जैसे कोयला ,जिसका कोई मोल नहीं होता लेकिन उसकी तफिश (गर्माहट) ,हीरे की चमक बढ़ाती है ।और अक़ीदत का सबक़ सिखाती है ।उसी तरह इश्क़ की गर्माहट भी बड़ी ही अजीब होती है ,जो ख़ुद फ़ना हो कर , अपने महबूब का इक़बाल बुलंद करती है ।इन्ही ख़यालात पर आधारित मेरी यह पंक्तियां ।

Word meanings :
ईल्म-ए-नुजूम - knowledge of astrology.
लाज़मी -necessary.
निग़ाह-ए-नाज़ - glance of love.
सादतमंदी - benevolence/righteousness.
पोशीदा - hidden.
तुलु-ए-इश्क़ - beginning of love ,arise of love.
मिस्ल-ए-दर्या - resembling like a river.
तब्दील - transform/convert.
अक़ीदत - immense respect for someone/something.
इक़बाल - प्रताप/तेज।

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Very nice attempt and nicely you have written it

Ishq, kabhi na khatam home wala ehsaas, khas Ko or khas tumhe banaya

bohot khoob, bohot umda…