मैं और मेरी मुश्किलें

मेरे अंदर की चीख़ दबा के
मैं अपने बाहर की खामोशी लाती हूँ;
कैसे बताऊँ कि मैं बस इक झील से मिलने,
कितने समंदरों को पार करके आती हूँ।।

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waahh :+1::blush:

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After a long wait, once again
I see you there

nice post and nice you :slightly_smiling_face:

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well penned!!!

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Oh wow… This is so nice

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