आत्महत्या

स्याही कम पड़ी होगी…मजबूरियाँ लिखने को,
लहू कम पड़ा होगा…अस्पतालों में बिकने को,
उम्मीदें जरजर हो गई होगी…पलभर भी टिकने को,
ऐसे ही वो बाप…नहीं लटका होगा फंदे में
बहुत कुछ होगा, जो पड़ा होगा उसके पीछे…उसे मारने को।।

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Suicide karne ke liye bahut saahas chahiye,

aisa karne ke liye bahut dawaab bana hoga uspar
jisne jindagi nahi maut ko bhi dost bana liya

nice post @Rupa_dey

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Agree with you sir…

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