नारी की गरिमा ..।

जो है जननी ,अन्नपूर्णा ,आदि शक्ति ,
उसपर मैं भला क्या लिख पाऊंगा ।
नारी की गरीमा कैसे हो बयां ,
क्या सूर्य को चराग़ दिखा पाऊंगा ।

     - शाहीर रफ़ी

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला: क्रिया।
(अर्थात : जहाँ स्त्रियों का आदर किया जाता है ,वहाँ देवताओं का निवास होता है । और जहाँ उनका अनादर किया जाता है ,वहाँ सारे काम निष्फल होतें हैं ।)
(Source : मनु स्मृति)

कलम की हयात ख़तम होगई लेकिन एक शब्द ,एक नुक़्ता भी लिख नहीं पाया तारीफ़-ए-औरत की शान में । ख़वातीन /नारी/औरत/स्त्री एक ऐसी अज़ीम ओ शान नैमत-ए-खुदाबंद है जिसको आम लफ़्ज़ों में बयां करना ,मेरे लिए असंभव सा प्रतीत होता है । पूरा दिन चला गया लेकिन ,अंतराष्ट्रीय महिला दीवस के अवसर पर कुछ लिख नहीं पाया ।मैं बड़ा ही नासाज़ महसूस कर रहा था । कि एक औरत के तज़किरात को बयां करने के लिए ,मेरी कलम की सियाही ठंडी पड़ गई है ।सच में नारी की गरिमा,उसकी महिमा को शब्दों में वर्णन करना ,बहुत कठिन कार्य है ।शायद यही कारण है कि मेरे लाख कोशिशों के बाद भी , नारी के विराट स्वरुप को शब्दों के ढांचे में ढालने में असमर्थ हुआ हूँ ।सम्मान नारी का गर करना हो ,तो एक दिन,एक माह, एक वर्ष ,एक युग भी कम है । जो नारी अन्नपूर्णा है,जगतुद्धारिणी है,जगत्कल्याणी है,आदिशक्ति है ,उसको भला मुझ जैसा अदना इंसान क्या शब्दों से तोलेगा । भला निर्गुण ज्योति के गुण का कोई आलेखन कर सकता है ।नारी का सम्मान एक दिन नहीं ,प्रतिदिन,प्रतिपल होना चाहिए । यही हम सबका संकल्प होना चाहिए ।

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That’s some really enlightening proverbs.
Thanks for sharing your thoughts.
I too feel that, no matter how much you write on women.
It’s always less.

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This post is really a great one, also they need equal support and space as others.