चाँद की छुअन

चाँद की छुअन

वो हर रोज उस खिड़की
में महसूस करती है ,
‘चाँद की छूअन’।
चुपचाप चोर सा
अंधेरे में खिड़की में उतरता है ।
छुपे हुए अन्जान ,
धब्बे को छिपाने की
नाकामयाब कोशिश !
सुँदरता की सुंदरतम मिसाल।
उसे पता है क्योंकि वो भी
चाँद सी है ,
और बहुत कोशिश करती है
रोशनी बिखेरने की,
पर नही छुपा पाती दाग ,
अपने स्त्रीत्व के कारण !
इसलिए वो हर रात उस
खिड़की पर महसूस करती है,
‘चाँद की छूअन’
©कविता वर्मा

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Very well penned :slightly_smiling_face: