माँ तुझे कैसे लिखु?

माँ तुझपे क्या लिखु?
माँ तुझे कैसे लिखु?
माँ तुझे कब लिखु?
माँ तुझे कहा लिखु?

तुझे बयां कर पाऊ ऐसे मेरे पास शब्द नहीं ꫰
तुझे लिख सके ऐसी मेरी कलम नहीं ꫰

दुनिया के लिए चाहे तू गलत मगर मेरे लिए सही ꫰
तेरी कुर्बानी समझ सकू इतनी मेरी औकात नहीं ꫰

हर पल दौडती घडी की टिक-टिक जैसी,
घडी शायद थक जाये पर मेरी माँ कभी थकती नहीं !

मेरी ख़ुशी में वो रोये मेरे दुःख में वो ना सोए
मेरी माँ मेरे साथ है ज़रूर मैंने कोई अच्छे करम केे बिज है बोए !

-सलोनी गौडा

4 Likes

Once again a good post to read and enjoy every bit of it, really interesting :slightly_smiling_face:

1 Like