ये बचपन इतनी जल्दी क्यों बीत जाता है

सबके जीवन में ख़ुशी का एक पल ज़रूर आता है,

वो पल ऐसा होता की उम्र भर के लिए ठहर जाता है।

में ज़िन्दगी में वो पल बचपन का था यारों ,

पर ये बचपन इतनी जल्दी क्यूँ बीत जाता है ।

बचपन की हर बात निराली होती है ,

हर दिन होली तो हर रात दिवाली होती है ।

आज ये दिन दूर दूर तक नज़र नहीं आता है,

ये बचपन इतनी जल्दी क्यूँ बीत जाता है ।

बो बारिश का आना ,कीचड़ में नहाना,

फिर घर पर आकर मम्मी की डांट खाना,

टीचर का आना ,बोरिंग चैप्टर पढ़ाना,क्लास में न जाने के बहाने बनाना।

आज ये पल याद आकार गालों को नहला जाते हैं,

ये बचपन के दिन इतनी जल्दी क़्यो बीत जाते है ।

काका के पेड़ से अमरुद चुराना, पकडे जाने पर दौड़ लगाना ।

बाग में जाकर माली को सताना,दोस्तों के साथ ठहाके लगाना ,

आज तो ये दिन टीवी और किताबों में ही नज़र आते हैं,

ये बचपन के दिन इतनी जल्दी क्यों बीत जाते हैं।

कैरम,खोखो,टीपू,गिल्ली डंडा, क्रिकेट,कंचे,लंगड़ी का फंडा।

शतरंज,कबड्डी,दौड़ लगाई, खेलों के कारण पढ़ाई गबाई।

आज खिलौनें बहुत हैं ,पर खेलने को तरस जाते हैं।

ये बचपन के दिन इतने जल्दी क्यों बीत जाते हैं।

पापा के पैसों से मौज उड़ाना, 1 रुपये के लिए स्कूल न जाना,

पैसे मिलते ही फूला न समाना, झट से फेवरेट वाली टॉफी ले आना।

अब तो लाखों रुपए भी उस 1 रूपये के आगे कम पड़ जाते हैं।

ये बचपन के दिन इतने जल्दी क्यों बीत जाते हैं।

लाइट के आने जाने पर चिल्लाना,रात को जागकर कुत्तों को भागना,

सिग्नल न आने पर एंटीना हिलाना ,किराये पर लेकर साइकिल चलाना।

आज भी ये लम्हें, याद आते ही रुला जाते हैं ,

ये बचपन के दिन इतनी जल्दी क्यों बीत जाते हैं ।

हमने तो जी लिया , अब बच्चों को भी जीने दो।

बचपन के शरबत को , जी भर के पीने दो।

मोबाइल, टेक्नोलॉजी से , ये लम्हे छिन जाते हैं।

ये बचपन के दिन बार बार नहीं आते हैं ।

6 Likes

Zindagi ka sabse haseen lamha, bahut teezi se guzar gya

2 Likes

the ending is superb…loved it man :heart::heart::heart:

1 Like

धन्यवाद
सही कहा आपने

1 Like

धन्यवाद
:heart::heart::heart: