माँ॥ माँ॥ माँ॥

माँ तुम बहुत अच्छी हो,
मेरी सबकुछ हो,
मैं कहीं भी रहूँ,
तेरे धड़कनों में हर पल धड़कती हूँ,
मेरे खाए बिना,
निवाला तेरे गले से भी नहीं उतरता है,
मुझे अपने कोमल हाथों से खिलाए बिना,
तुझे चैन नहीं आता है,
मैं जो एक पल भी देर हो जाऊं,
घर की चौखट पे तू आ जाती है,
मेरी एक मुस्कान के लिए,
दुनियाँ से तू लड़ जाती है,
माँ तू इतनी अच्छी क्यूँ है,
मेरी मुस्कान भी तुझसे है,
औऱ पहचान भी,
मेरा आस्तित्व भी तू,
औऱ मेरी सांसों की देता भी तू,
रात-रात भर तू भी तो मेरे साथ जगती हैं,
मेरी परीक्षा का भार,
तू अपने सर क्यूँ लेती हैं?
लोगों ने कहाँ मैं तेरे जैसी हूँ,
क्यूंकि मैं सिर्फ तुझसे ही हूँ,
तू जहाँ है हमारी,
जान है घर की,
मेरी सबसे अच्छी दोस्त,
मेरी कहानियों घंटों सुनने वाली,
मेरी हमसफ़र माँ है तू,
माँ मैं कर्जदार हूँ तेरी,
तेरे हर उस बलिदान की,
नौ महीनें उस दर्द की,
औऱ जिंदगी भर तेरे आँचल की,
तेरी गोद से ज्यादा सुकूँ,
मुझे कहीं नहीं मिलता,
मैं कहीं भी जाऊं,
तेरा आँचल सदा मेरे सर पर रहता,
मैं खुश हूँ क्यूंकि तेरे साये तले हूँ,
औऱ गुलजार हूँ क्यूंकि तेरे बगीये का फूल हूँ,
मैं तेरी कर्जदार-ए-मोहब्बत हूँ,
तेरी ऋणी ता-उम्र हूँ,
कर्ज चुकाना तो दूर,
मैं सोच भी नहीं सकती,
मैं अपनी सांसें गिरवी रखकर भी,
तेरा ऋण दे नहीं सकती,
माँ तू सबकुछ हैं मेरी,सबकुछ हैं मेरी॥
:heart:

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