जब भी थक जाती हूँ

जब भी थक जाती हूँ,
इस दुनियाँ कि भीड़ में खो जाति हूँ,
तो तुम्हारे हाथ को ही तलाशती हूँ,
जब कभी लड़खड़ाती हूँ,
तो तुम्हे अपने पास खोजती हूँ,
जब भी इन पलकों से अश्क बहते हैं,
तेरे कन्धे को ही तलाशते हैं,
तू कहाँ गुम हो गया,
इस भीड़ में मुझे छोड़,
क्यूँ किसी और का हो गया,
अंधेरे में भी तेरा चेहरा ही नज़र आता हैं,
तु पास नही पर,
हर पल ये दिल,
तुझे ही तलाशता हैं,
कम्बक्त मानता ही नही,
कि तुम अब कभी,
इन गलियों का रूख नही करोगे,
और धीरे से,
मुझे सब ठीक हो जाएगा नही कहोगे!

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Wow wow wow. :heart::heart::heart::heart:

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Sab thik ho jayega wo aye ya na aye , keep faith !
:neutral_face:

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tq

Just a thought sir

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no need of sir, can refer by first name :joy:

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Hehe yeah sure…

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Beautiful piece…
Well be happy… You deserve the best… :hugs::hugs:
Think about those who left their loves in some accident and suicides

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Thank-you so much…hehe just a thought😊

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