ऐ ज़िन्दगी

ऐ ज़िन्दगी आज यही थम जा और हमारा हाथ थम ले, ऐ ज़िन्दगी जरा हमे भी मुड़कर देख गेरो को भूल जा, ऐ ज़िन्दगी मेरी नन्ही भूलो को भुला कर मुझे खुद से जोड़ ले, ऐ ज़िन्दगी शिकायते बहुत है पर आज विराम चाहूंगी…ज़िन्दगी में थोड़ा ठहराव चाहूंगी

ऐ ज़िन्दगी एक ख्वाइश मेरी जो तू भली-भाति जानती है ,बस उसे पूरा करने में मेरा हाथ थाम ले, ऐ ज़िन्दगी नफरतो के बादल बहुत बन गए ,जरा उन्हें अपने प्रेम से दूर कर, ऐ ज़िन्दगी जमाने के लाख सवाल सुन थक गयी हु में कभी तो इस दुनिया को उसकी औकात दिखा

ऐ ज़िन्दगी प्रेम का साया बहुत है तुझसे, जरा उनमे से एक ढूंढ दे मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी जीवन के संकटो से हमे बचाना और प्रेम देना, ऐ ज़िन्दगी काले साये मेरी जान को लूटना चाहते है, मेरे तन की गहराई को नापना चाहते है ,मेरी पहचान को छीनना चाहते है, मेरी आरज़ू पाताल में दफ़न करना चाहता है___

ऐ ज़िन्दगी एक गुज़ारिश है की मेरा साथ कभी न छोड़ना…तुझ बिन में अधूरी हु…

-Ritika Gusaiwal

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Just beautifully penned

Loved. :heart:

Thanks a ton! :slight_smile:

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Shukriya! Glad uh loved!

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You’re most welcome

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