है कुछ तो

इरादे क्या जिस्म भी अब तो बेजान है,
वो जानवरो से ज्यादा जानवर है,

रात की तन्हाइयो का सवूर है,
देखु क्या उन्हें अब सिर्फ जीने का तसव्वुर है,

ख्याल भी खाली है,
ए मेरे खुदा लगता है अब तू भी झाली है।

फिर भी देख देख तेरे दर पे आया सवाली है,
ज़ोली भरदी तो तू मसीहा वरना में नही कहिका।

#नादान

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