खलिश थी

कोई खलिश थी उसकी आँखों मे,
कोई शिकवा था उसके लब्जो में,

था भरी महेफिल में भी वो तन्हा,
मील जाए मेहबूब ऐसा वो ढूंढ रहा था लम्हा।

#नादान

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