दीवानगी!

तू इस कदर मेरी रूह मैं बसने लगी
मेरी हर धड़कन तेरा ही नाम गुनगनाने लगी !
तेरे लिए मेरी दीवानगी कुछ इस कदर बढ़ने लगी
हर चेहरे में मुझे सिर्फ तेरी सुरत दिखने लगी !
तुझे पाने की ज़िद मुझे इतनी बेचैन करने लगी
की हर मंदिर मस्जिद में मेरी पलके झुँकने लगी !
तेरे लिए मेरी दीवानगी कुछ इस कदर बढ़ने लगी
मोहब्बत भी मोहब्बत केे नाम से डरने लगी!

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Obsession at its heights

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haaye…!! ye mohabat bdaa tadpate hai…!!
well penned!!

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thank you