दुआओ का सिलसिला!

दुआओ के उस मंदिर मे पहली बार,
कूछ खुद के लिए मांगा,

चाह कर भी तुमसे दूर जाने कि ख़्वाहिश नही थी,
पर पास रहकर भी तुम्हारे प्यार कि कमी सी थी,

मेरे पास जो कुछ भी था सब दे दिया,
सिर्फ एक ही उम्मींद हैं,

मेरे इस प्यार कें महल कें मलबे से,
अपनी मोहब्बत क़ा आशियाना बनाना मत भूलना,

किसी पराए कें महल तले दफन ही सह़ी,
मेरी मोहब्बत उस मोहब्बत को संभाले रखेगी॥

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such beautiful lines… loved it…

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Tqsm Sir…:pray:

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