प्रीत

कागज़ की कश्ती में समंदर का पानी,
थोड़े से रंग और रेशमी कहानी ।
ढलकी शाम की स्याह देहरी पर,
तेरे चाँद की मखमल सुहानी।
बंद किवाड़ों से छन-छन के,
आती है जो हवा निराली।
प्रीत की चास में घुली है तेरे प्रेम की नमकीन कहानी।
©कविता वर्मा

4 Likes