सफलता के लिए मुझे इंतजार करना नहीं आता

poem
#1

सफलता के लिए मुझे इंतजार करना नहीं आता,

मै चल पड़ता हूं , जहां मंजर नजर नहीं आता।

रुकता नहीं मै मुश्किलें देखकर,

गिरता हूं बेशक कई बार मैं,

पर बेवश होकर मुझे बैठना नहीं आता,

हार जाऊं ठोकरों से ऐसा नहीं है,

बनकर चट्टान मैं खड़ा रहूंगा,

जिंदगी की कठिनाइयों से वाकिफ हूं,

कई बार रंग बदलते मौसमों से वाकिफ हूं,

पर मुझे पतझड़ की तरह वीरानों में रहना नहीं आता ,

खिलता रहूंगा फूलों की तरह मैं,

महक रहेगी सदा ही अच्छाइयों की कर्मों में,

क्योंकि सफलता के लिए मुझे इंतजार करना नहीं आता।

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#2

bohot hi lajawab :slight_smile:

#3

धन्यवाद नेहा जी

#4

Beautiful

#5

thanks