सुनो★**********

सुनो! मुठ्ठी भर
रंग घोल दो ,
जिंदगी में ।
नही देखे रंग और रौशनी
के त्यौहार ।
एक उमर और जी लूं ,
हवाँए नई साँसों में घोल दो।
सुनो सपने खरीद दो ,
नींदे सूनी है, आंखों की किश्ती में।
बहा दो लहरें कई
या के गहरा हरा समन्दर
ला दो , नये मौसम ,
झीनी सी ठन्ड में नही नहायी कभी।
सुनो, फीके सा ज़ायका है
ढलते से दिनों का ,
कोई सूरज चमका दो कहीं।

सुनो मुठ्ठी भर रंग घोल दो,
बहती उमर में ,
ओढनी तो ओढ लूँ,
सुर्खी छाँव की।।

©कविता वर्मा

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Wow! बहुत खूब! :heart:

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