सुख-दुख

दुख क़ो इतनी तवज्जो दे दी,
की खुशियाँ मेरे अंगने से चली गयी,
जाते जाते मुझसे ये कह गयी,
देख लेना मुझे किसी और अंगने मेँ !

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