स्कूल कें वो दिन

आज़ सुबह कि चाय कें साथ,
वो बीते दिन कि यादें भी ताज़ा हो गयी,
मम्मा क़ा यू सुबह धक्के मार कें,
बिस्तर से उठाना,
औऱ 10मिं. कह कर आधा घंटा और सो जाना,
पायल कि छन-छन सुन कर,
कमरे कि दहलीज में पहुचने से पहले,
यू उठ कर बैठना जैसे 10मिं पहले ही उठ गए हो,
सुबह सुबह नहाने कें लिए बहन कें साथ लड़ाई करना,
उन केशों को बंधवाने कें लिऐ पूरे घर में मँडराना,
और घर से उस हड़बड़ी में भागना,
जैसे जिंदगी औऱ मौत क़ा सवाल हो,
लेकिन फ़िर वो गाड़ी क़ा स्टार्ट न होना,
और कुछ नहीं सोने में सुहागे जैसा,
वो रेलवे फाटक क़ा बंद हो जाना,
और फ़िर खुद को ज़ी भर कें गलियाँ देना ,
कि थोड़ा जल्दी ही उठ गयी होती,
हाये!..वो स्कूल कें दिन,
आज़ बड़े याद आते हैं॥
बस बड़े याद आते हैं॥

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Bht hi bdia treeke se byaan kia h apne❤

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thankyou so much…

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:blush::pray:

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