वक्त की गर्दिश

यू वक्त कि गर्दिश से वो लड़ती रही,
जमाने से न डरी बस आगे बढ़ती गयी,
न तूफ़ान में इतना दम कि उसकी रफ्तार नाप सके,
न लोगो क़ा ग़म जो उसे पीछे छोड़ सके,
खुद क़ो तवज्जोह देते वो बस आगे बढ़ चली॥

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Deep thoughts and finally a chapter of his life

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Yeah :v: