माँ की ममता की अति...!

#माँ_की_ममता
माँ का प्यार बच्चे को कठिनायों से बचाता है, लेकिन उसकी यदि अति हो जाए तो बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने से रोकता भी है।

ऐसा ही एक उदाहरण - एक घर में अपने एक बच्चे के साथ पति और पत्नी रहते हैं।
पिता की बच्चे से थोड़ी कम बनती है अर्थात बच्चे की बचकानी हरकते पिता को अच्छी नही लगती। बच्चा अपने खुद के दिमाक की कम करता है, अपने माता पिता की कही ज़्यादा करता है।
पिता के साथ बच्चे के भाव न मिलने पर माँ बच्चे की ढाल बनकर खड़ी होने लग जाती है।
यहा तक तो सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन कब माँ की वो ढाल बच्चे को कुछ नया, कोई अनुभव सीखने से रोकने लगी। माँ को ही पता न चला।
बच्चा यदि कोई गलती करे तो उसके ऊपर गुस्सा करना ही बात का समाधान नही होता है।
और माँ के द्वारा सही हो या गलत हो हर बार बच्चे के लिए ढाल बनना माँ की ममता नहीं कहलाती है।
अब यहां एक उदाहरण के द्वारा समझाने की कोशिश करते हैं - बच्चे ने भूल वश पिता के नाम को गलत लिख दिया। इस पर पिता को गुस्सा आ गया कि मेरा नाम भी लिखना भी आता। पिता बच्चे की माँ अर्थात् अपनी पत्नी से कहता है कि उसे मेरा नाम भी लिखना नहीं आता है।
अब यहा पर माँ की ममता है कि, पिता के सामने बच्चे की तरफ हो कि कोई बात नहीं गलती से लिख दिया होगा आगे से ध्यान रखेगा, दोबारा ऐसी गलती नही करेगा।

और मां की ममता की अति कुछ इस प्रकार है - बच्चे की गलती बिल्कुल नकारते हुए सभी से बहस करना की, यदि ये गलत नाम लिखता है तो उसके डॉक्युमेंट्स में पिता नाम सही कैसे है…? इसने जो फ़ॉर्म फ़िल किए हैं उनमे पिता का नाम सही कैसे है…? Etc… Etc…
यहा बच्चे को क्या सीख मिली…?
"कुछ नहीं, उसने ये सोचा ही नहीं कि हाँ, तेरे से गलती हो गयी है और आगे से इस बात का ध्यान रखना है कि दोबारा ऐसा नहीं हो।

मुझे लगता है कि मैं जो बात समझाने की कोशिश कर रही हूँ, वो बात आप सभी समझ गए होंगे।

इसलिए आपसे विनम्र निवेदन इतना है कि, छोटी - छोटी गलतियों से ही यदि हम सीखने लग जाएंगे तो जीवन में उन्नति की तरफ बढ़ते कदमों को कोई नही रोक सकता है।
और यदि ऐसे ही माँ के पल्लू के पीछे छुपना है तो वो दिन दूर नहीं जब आपके बच्चे ऐसे ही कोई गलती करेंगे, लेकिन आपके पास उनको सही राह पर लाने और उनका मार्गदर्शन करने के लिए कोई ज्ञान नही होगा और आप अपने बच्चो पर पड़ता‍डना ही करते रहोगे। क्योकि आपको आपकी गलती जब बचपन में ही दिखलाई न दी तो जब बड़े हो जाओगे तो बिल्कुल दिखलाई नहीं देगी। आपकी कही हर बात आपको शत प्रतिशत सही लगेगी। वो बात या वो कथन सत्य हो या न हो।
अंत में यही कहना है कि, “जीवन को अनुभव युक्त बनाओ, भेड़ चाल मत चलो”

जीवन में बहुत सी बातें ऐसी होती हैं जिनका ज्ञान हमे हो सकता है यदि हम एक बार प्रयास कर ले। लेकिन बात तो ये है कि जब आम मिल गए तो पेड़ की जानकारी क्यो लेनी है… पैसे दो और आम लो।क्योकि सभी लोग पैसे से आम खरीदते हैं ना।
लेकिन जो लोग पेड़ के बारे में भी जानकारी हासिल कर लेंगे और उसके बाद भले ही वो पैसे से आम खरीदे। लेकिन कभी उनसे किसी ने पेड़ के बारे में पूछ भी लिया तो उनके चेहरे पर चुप्पी नही रहेगी वो कुशलता से सामने वाले को अच्छे से विवरण दे सकेंगे।

अंत कुछ ज्यादा ही लम्बा हो गया… :blush:
#अनुभव
Kittu_ki_diary

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:heart::heart:

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Wow

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