बाबुल की गलियाँ

बाबुल कि गलियों में फ़िर एक दफा वो लौट आई,
पायल कि छम-छम फ़िर से इस आंगन में गूँज उठी,
हँसी-ठिठोली का सिलसिला फ़िर यू चल पड़ा,
माँ की गोद में सो कर लोरी वो सुनने लगी,
पिता से कंधे से कंधा मिला कर वो फ़िर चलने लगी,
बहन संग शरारतें वो करने लगी,
आंगन की बगिया फ़िर से महक उठी,
बाबुल की गलियों में फ़िर एक दफा वो लौट आयी॥

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thankyou :heart: