ज़िन्दगी और मौत

वो कहते थे, के ज़िन्दगी हो तुम मेरी
लाज़मी था हमारा बिछड़ जाना
ज़िन्दगी ने क्या कभी की भी है वफा?

हम उन्हें अपनी मौत की तरह चाहते रहे
वो चाहे रुठे या हो जाये खफा
एक दिन वो मेरे पास आयेंगे
मेरी वफा से करने वफा

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:two_hearts:bahut khub

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Thank u

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Welcome

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