वक़्त बचपन का

poem
#1

एक वक़्त बचपन का था…
जब बारिश में कागज की कश्ती चलाकर बेखौफ
बेहिसाब खुशियों को जी रहे थे;
वहाँ न कोई डर था,
और न ही कोई चाहत…
आज जिंदगी की समंदर में मौत का नाव खै रहे है,
जहाँ किनारे तक पहुँचने की चाहत भी है…
और तूफ़ानी लहरों से डूब जाने का डर भी है।

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#2

Loved the way u showed the difference :heart:

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#3

Great. :heart:

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#4

Sach kahani sach mein bachpan :two_hearts::two_hearts:

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