आगे बढ़ो

जिंदगी का ये खेल हैं बाबा,
ज़रा संभल के खेलना,
आगे-पीछे ,उपर नीचे न करना,
रास न आये ये गलियां,
तो दुबारा मत लौटना,
लेकिन पीछे मुड़ के कभी मत देखना,
यू चंद लफ्जों की कहानी तेरी,
दूसरो की मुजुबानि मत सुनना॥

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Every line hides a darkest truth

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Yeah it does…

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