सुनिए हुकुम,

आज हम कुछ आपको बताते है,
अपने दिल का हाल आज हम आपको सुनाते है,
हिम्मित् नहीं है मुझमें,
कि आपसे अपनी मोहब्ब्त् का इकरार करू…
ताक़त नहीं है मुझमे,
कि मैं आपकी दोस्ती का तिरस्कार् करू…
लफ्ज़ो से ज्यादा आपकी आँखों को पढ़ना अच्छा लगता है,
बातों से ज्यादा आपकी ख़ामोशी को सुन्ना अच्छा लगता है…
जिस कदर से करते हो ना आप फ़िक्र मेरी,
ना चाहते हुए भी आपके करीब आने को दिल चाहता है…

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Great Enthusiasm!

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:heart::heart:

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