रास्ता

जब लोगो ने बोलना शुरु किया,
तो सड़के चुप-चाप सी सुन -सान रह गयी,
घऱ की याद सताने लगी,
तो तकिए के नीचे सर रख कर वो रोने लगी,
पगडंडी में चलने की कोशिश की तो पता चला,
लोग ही नहीं रास्ता भी काटों से भरा हैं ,
बस आगे बढ़ने की उम्मींद,
उसे जीते के करीब लेटे चली-लेतें चली॥

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nice post @ElleG :+1::+1::+1:

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Thank you. :blush:

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