मुझको माफ कर देना माँ

हो सके तो मुझको माफ कर देना माँ.
मुझको सपने सच्चे मेरे करने थे माँ.
तुझसे दूर जाकर, अक्ल आती है माँ.
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

अपने मुल्क में भी, हो सकती थी तैयारीयाँ
क्यूँ मैंने चुनी, तुझसे इतनी सारी दूरियाँ.
इतना दूर हूँ, के तू नज़र ना आती है माँ,
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

अरबीयों की डोंगरी मे, नौकरी मैं करता हूँ,
पैसे थोडे ज्यादा को, दिन रात मैं मरता हूँ,
कभी खाली पेट, कभी सुखी रोटी है माँ,
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

मैं गिरा तो, यहाँ कोई पूछता नहीं,
दर्द ही देते सारे, आँसू पोंछता नहीं.
तूही ही एक सीने से मुझे लगाती है माँ.
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

वक़्त ना दिया तुझे, कितना मैं मसरूफ था,
तेरे आंचलों में पहले कितना महफूज़ था,
तू जो साथ हो तो मौत, खौफ खाती है माँ.
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

गिरना है, उठना है, लड़ कर फिर जीतना है,
तुझको ये दुनिया, फिर मुट्ठी में करना है,
यही सबक, हर पल सिखाती है माँ,
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

हुई थोड़ी देर, पर समझ मुझे आ गया,
एक तू ही है मेरा, दूसरा नहीं ख़ुदा,
तेरे बिना, ज़िन्दगी, ना ज़िन्दगी होती है माँ.
मुझको तेरी याद बहोत आती है माँ.

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Good post

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great post @Pratik_Lokhande

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maa ke bena mushkil hi nahi nammukin , bahut khub

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