ग़ज़ल : रदीफ़ कौन देता है

बिना देशप्रेम के अपनी, कुर्बानी कौन देता है
जवानों के बिना अपनी, जवानी कौन देता है

पानी दूध जैसा हो गया, आजकल के वक़्त में
बिना कीमत अब पीने को, पानी कौन देता है

बीत गया वो वक़्त, जब हीरा पहचान होती थी
अब रखने को अंगूठी की, निशानी कौन देता है

उनके सदके, जो अपनी ही जमीं पर लिखने देते हैं
कथन पर अपने यूँ लिखने, कहानी कौन देता है

हर सांस में है तू, तुझे सजदा है बारम्बार
साँस लेने को, हवाओं को, रवानी कौन देता है

तैरना है अमिता तो, पानी में उतरना तुझे होगा
बीच मझधार अपनी कश्ती, दीवानी कौन देता है

अमिता गुप्ता मगोत्रा

स्वरचित

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kaafi accha h !
:heart:

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Just mind-blowing

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