जान बाकी है ज़िंदगी

थका हूँ, रुका हूँ, पर हारा नहीं हूँ मैं,
मुझमें और बहोत सी जान बाकी है, जिंदगी.

कुछ पल तो ठहर के समझ ले मुझको,
अभी ठीक से जान पहचान बाकी है, जिंदगी.

फलक से गिरकर, मैं टूट भी जाऊँ तो ग़म नही,
मेरे हौसलों की असली उड़ान बाकी है जिंदगी,

ख्वाहिशें, कुछ ख्वाब, खाक हुए मगर,
दिल में उबलते अरमान बाकी है जिंदगी.

बेवफा हो जाना, तेरी फ़ितरत ही है ,
मुख्तसर ही सही, पर ईमान बाकी है ज़िंदगी.

मेरी पहली शिकस्त पे इतना, ना इतरा ए ज़ालिम,
मुझसे तेरे, और भी इम्तिहान बाकी है जिंदगी,

लगा लेना ज़ोर जितना भी है तुझमें,
मेरे भी जीत जाने के, इमकान बाकी है, जिंदगी.

मुख्तसर - Little
शिकस्त - Defeat
ईमान - Faith
इमकान - Possibilities

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