बाकी है

अंजुम की आखरी किश्त भी बह गई,
अब सिर्फ टूट के बिखरा क़ल्ब बचा है,

शाम गुज़रती है सन्नाटे में,
राहो में बिखरे सिर्फ कांटे है,

वजूद उसका है नही कहि मौजूद,
ज़िंदा दफन हु दरम्यान-ए-ताबूत,

हु अब भी उसकी यादों का कैदी,
वो बन चुकी मेरे जिस्म की भेदी।

#नादान

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very nice composition bro