क्यों न आज मुस्कुराया जाए

क्यों न आज मुस्कुराया जाए…

गुजार दी कई रातें गम में उदास रहकर…
क्यूँ ना एक दिन हंस कर बिताया जाए…
क्यों न आज मुस्कुराया जाए…

जो हंसते हैं हमे रोता देखकर…
क्यों न हंस कर उनका दिल जलाया जाए…

क्यों न आज मुस्कुराया जाए…

जिसे आएगी ही नहीं कभी याद हमारी…
क्यों न उसकी यादों को मिटाया जाए…

क्यों न आज मुस्कुराया जाए…

किए थे जो दर्द बयां ज़माने में …
क्यूँ न उन्हे दिल में ही छुपाया जाए…

क्यों न आज मुस्कुराया जाए…

मायूस था जो चेहरा गम से,
क्यों न नयी उमंग से इसे खिलाया जाए जाए…

क्यों न आज मुस्कुराया जाए…

:blush::blush::blush::blush::blush::blush::blush::blush:

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bahut khoob, bilkul, muskuraya jaaye !

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Just amazing, very well penned…

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@thegurjyot
Thank you so much

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Hey its nice to see your work.
Keep writing

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@navjyotsingh.rajput thank you

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