पराई आस

देवदास को भी लगी थी आस,
की बुझाएगी पारो ही उसकी प्यास,

पर जूठी थी वह आस,
क्योंकि पराई आशा सदा करती निराश,

इसलिए उठ ओ देवदास,
जा महखाने तक और बुझाले अपनी प्यास।

#नादान

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