" टेक्नोलॉजी नामक अफ़ीम....।"

poem
#1

डिजिटल युग के लोग हो तुम,मोबाइल तुम्हारा धाम है,
सब से नाता तोड़ चुके हो , बस फ़ेकबुक में नाम है ।

तुम टिक-टॉक के अभिनेता , तमाशा तुम्हारा आम है,
फ़िल्मी पागलपंती है कैसी ,यह कैसा संग्राम है ।

तुम्हारे ठाट - बाट से,भर चुका सारा इंस्टाग्राम है,
डीपी का हीरो हीरालाल ,मोहल्ले का घनश्याम है ।

पब - जी के खिलाड़ियों का,मचा बड़ा कोहराम है,
वक़्त की फ़िकर है किसको,चिकन डिनर का ईनाम है ।

डेटा के भाव सस्ते हैं भैया,महेंगे सब्जी के दाम हैं,
अमीरों का वैभव बढ़ता जाए, ग़रीब बोले राम राम है ।

यू ट्यूब पे गाने,मनोरंजन,और हास्य मिलता तमाम है,
बचपन से चश्में हैं लगते,यह इसका अंजाम है ।

सेल्फी,पेल्फी की नौटंकी, यही तुम्हारा काम है,
तरह - तरह के चहरे बनाना,कब तुम्हे आराम है ।

किंडल,विकिपीडिआ आदि, अब पढाई के मक़ाम हैं,
लाइब्रेरी अब कौन जाता है , अब किताबें बदनाम हैं ।

तकनीकी रोबोट बन गए,सोशल मीडिया के ग़ुलाम हैं,
इंटरनेट के भक्त हैं सारे, दर्शन करते सुबह शाम हैं ।

                   - शाहीर रफ़ी
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#2

nice post brother :slightly_smiling_face:
keep going

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#3

Bohot ummda Likha hai… Bohot khoob…

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#4

Kya khoob likha hai

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