बवाल ए इश्क

love
#1

हट ती नहीं नजर तू जख्म पे मरहम की तरह है
लिपट जाऊं तेरे जिस्म से तुझे पाने की दिल को चाह है…

हूं हर पल का मै कैदी तेरी आंखो का इनका नशा जो किया है
हटती नहीं नजर कोई पाप नहीं किया है

में आइने से कई घंटो नज़रे मिलाए बैठा हूं
बवाल मचा है तेरे इश्क का अब अक्स तेरा ही मुझको दिखता है।

बवाल मचा है गलियारों में चर्चे इश्क़ के चल रहे है…
फितूर चड़ा है हुस्न का तो कुछ तनहा ही जल रहे है…
मिलन नहीं आसान बड़ा , तूफां गलियों में चल रहें हैं

बवाल मचा है गलियारों में चर्चे हुस्न के चल रहे हैं
बवाल ए इश्क के काफिले सुलग के जल रहे है

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#2

Well written, Welcome to YoAlfaaz family

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#3

interesting topic and more is it’s content
i liked reading it @Snowluvdairy
also
Welcome to YoAlfaaz family
keep writing and sharing :slightly_smiling_face:

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#4

Good to read you. :heavy_heart_exclamation:
Welcome to YoAlfaaz. :heavy_heart_exclamation:
Keep writing. :heavy_heart_exclamation:

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#5

Too

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#6

Thanks

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#7

Welcome to Yoalfaaz @Snowluvdairy

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