"झूठे वादे"

मालूम है सच क्या था और क्या फरेब
फिर भी इश्क़ उससे बेतहाशा करते हैं,
हम आज भी उस झूठे वादों से
उम्मीद बहुत सारा करते हैं;

वो बात अलग है कि
अब इकरार-ए-गुफ्तगु करने से
बहुत ज्यादा ही डरते हैं,
फिर भी उस झूठे वादों से
उम्मीद बहुत सारा करते हैं;

एकतरफा था शायद ये प्यार मेरा
हर बार इस बात को नकारा करते हैं,
हम आज भी उस झूठे वादों से
उम्मीद बहुत सारा करते हैं;

देख के गैरों की बाँहों में उसे
हर बार खुद का बहुत खसारा (नुकसान) करते हैं,
फिर भी उस झूठे वादों से हम
उम्मीद बहुत सारा करते हैं;

भरोसा करते नहीं अब किसी पर भी
फिर भी तन्हाई में उसे पुकारा करते हैं,
हम आज भी उस झूठे वादों से
उम्मीद बहुत सारा करते हैं।।

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amazing post @Rupa_dey
awesome really

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Awesome , claps, claps n clapssss

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