"चुनाव"

है चुनाव या है बीमारी,
हर नेता है आफत भारी;

महबूब से(सा) वादे करे हर बारी,
भूल जाए बाद में हर सत्ताधारी;

पूछने पर, करे गुणगान इस प्रकारी(प्रकार),
जैसे हो कोई न विश्व में, इनसे ज्यादा आभारी;

है चुनाव या है बीमारी,
हर नेता है आफत भारी;

साठ सालों तक समझ बैठा कोई
कि ये कुर्सी है उसकी विरासत पुरानी,
भूला दिया था उसे हमने ही शायद
कि ये देश है यारों लोकतंत्र वारी(वाली);

त्योहारों में जैसे होती है किलकारी,
लोकतंत्र में ठीक वैसे ही
चुनाव की होती है तैयारी;

है चुनाव या है बीमारी,
हर नेता है आफत भारी।।

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Change is needed. Well penned. :heavy_heart_exclamation:

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Very true , appreciate your selection of a variety topic to pen. Keep contributing more and more such variety posts…clapssssss

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kya rang ranga hai chunaav ka
bahut bhadiya @Rupa_dey :slightly_smiling_face:

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