बेअल्फ़ाज

बेअल्फ़ाज से जज़्बात मेरे
आज मुझसे ही मेरी सज़ा पूंछे
भटक रहें हैं दर बदर
वो एक आसरा ढूँढें
दे कर तेरा पता, मेंने उन्हें रुख़सत किया
तेरे दरवाज़े खड़े हो कर
वो तुझसे तेरी रज़ा पूंछे
बेअल्फ़ाज से जज़्बात मेरे
आज मुझसे ही मेरी सज़ा पूंछे

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Well penned…

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Thank you

Superb lines… Very nice…

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amazing interesting post friend :slightly_smiling_face:

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Thank you

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Thank you .

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