नागौरा(मजबूत)

“नागौरा”

मैं इश्क़ की रेत नहीं, मैं धरती का गौरा,
मैं उठती लहरों में नाव हु, देश मेरा नागौरा।

इश्क़ का समंदर,
लूट जाता है हरेक इसके अंदर,
पर मैं मझधार में उभरकर,
सामने खड़ा हो जाता हूँ डटकर,
मैं हिन्द देश का एक छोरा,
है जो देश मेरा नागौरा,

धूल उड़े तो उड़ने दूँ,
अपनी मुठी में हवा भरूँ,
छोड़ लक्ष्य को मैं न मरू,
क्यों मैं हकीकत से डरु,
मेरा रक्त तो उसी का है जिस देश धोरा,
है प्रमाण यह सत्य देश मेरा नागौरा।

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bahut khoob dost, bahut khoob @Ram.k.choudhary

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Nagora ko apne kafi khoob prastut kia

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धन्यवाद

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धन्यवाद जी

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One of the best posts, keep it up…

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जी आभार

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