तुम, मेरे सबकुछ

जब सब कुछ मेरे विपरीत होगा,
जब मेरे लिए बोझ, हर एक रीत होगा,
मैं तब भी ये प्रीत निभाऊंगी।।

जब मेरे होंठ लफ्ज़ को तरसेंगे,
जब मेरी आँखें…तेरे दीदार को तरसेंगी,
मै तब भी तुझे ही अपनी कविता में उकेरूंगी।

जब मेरे हर लफ्ज़ में बस संगीत होगा,
जब मेरे लिखे अल्फ़ाज़, तुम्हारे लिए गीत होगा,
मैं तब जाकर तुम्हारी मीत कहलाऊंगी।।

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amazing interesting post friend:slightly_smiling_face:

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