क़फ़स

छोड़कर हाथ, वो बाँहों में भर लेता था,
सीने से लगा के, चले जाने को कहता था…
सच कहूँ!
न जाने क्यों, तेरी बाँहों का वो क़फ़स हमें बहुत जँचता था।।

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:heart::heart:

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are wah, bahut khoob :heart_eyes::heart_eyes::heart_eyes:

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