न जाने कब न जाने कैसे

न जाने कब
ना जाने कैसे।
किसे खबर थी,
कुछ होगा यूँ ऐसे।
आंखें मिली थी जब,
धुन बजी थी हृदय से।
आग़ोश में लेना चाहता था,
कमबख्त देख भी ना सके भय से।
ज़ख़्मी हम तो हुए ही,
ज़ख़्मी वो भी हो गयी वैसे।
फिर आये हम करीब,
और जुड़ गए हृदय से।
कहाँ खबर थी,
प्यार होगा यूँ ऐसे
ना जाने कब
ना जाने कैसे।

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Kafi accha likha hai issko aapne

amazing interesting post friend :slightly_smiling_face: