होगी तेरी जीत

यू मायूस बैठा क्यों है तू
इस भीड़ में खोया क्यों है तू

सर उठा दो कदम बढ़ा
कब तक रहेगा यूँ खामोश खड़ा

वक़्त तो तेरा आएगा ही
जो भी चाहा है तू पायेगा ही

ठोकरे खाने से डर मत तू
इस कदर कमज़ोर पड़ मत तू

हौंसला रख ओर भरोसा रख
मंज़िल की ओर चलते रह ,ना तू थक

एक दिन आएगा वो दिन ज़रूर
मंज़िल पा कर होगा जब तुझे खुद पे गुरूर

भरोसा रख ओर इंतज़ार कर मेरे मीत
वो दिन दूर नही जब होगी तेरी जीत।

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Good one…
Keep writing such work
It’s really nice to have such works on our platform.

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amazing interesting post friend :slightly_smiling_face: