मैं और आकाश

जब उब जाती हूँ खुद से भी, तब
एक टक निगाहों से आकाश को ताकती हूँ;

है कितना घनघोर अँधेरा,ये देखने को
उस आसमानी लहर के अंदर झाँकती हूँ।।

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Well penned dear!!
Loved how you said a lot in a simple way!:blush:

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So beautiful :heart_eyes:

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amazing interesting post friend :slightly_smiling_face:

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