सच्चाई...सच की।

जंग छिड़ी है
राजाओं में नहीं, राज़दारों में;

खुला है भेद कुछ लोगों का
सभाओं में नहीं, चारदिवारों में;

दफना रहे हैं वो ताबूत
क़ब्रों में नहीं, कारागारों में;

हावी हो रही है हैवानियत
जानवरों में नहीं, इंसानों में;

निभा रहे हैं रिश्ते सब
रिश्तों में नहीं, गलियारों में;

जता रहे हैं प्यार सब
कागज़ों में नहीं, अखबारों में;

दिख रहा है मुझे सब कुछ
उजालों में नहीं, अंधकारों में!!

4 Likes

Wow!!! Truly amazing… :heart:

2 Likes

Darkness is sometimes way beautiful than that of light

1 Like

amazing interesting post friend :slightly_smiling_face:

1 Like