अपनी अपनी किस्मत है

अपनी अपनी किस्मत है
देखो किसे क्या मिलता है।

कोई रोटी पा कर रोता है
कोई रोटी के लिए रोता है

कोई किस्मत को ताने देता है
कोई किस्मत से खाना खाता है

कोई खुशी के मारे रोता है
कोई खुशी के आस में रोता है

कोई प्यार पाकर रोता है
कोई प्यार पाने को रोता है

कोई मरते मरते जी जाता है
कोई जीते जी मार जाता है

अपनी अपनी किस्मत है
देखो किसे क्या मिलता है।

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Loved how it ended with “देखो किसे क्या मिलता है!” Which make your poetry different yet beautiful :slightly_smiling_face:

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It’s like human practical life poem

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Bahut khoob, bahut khoob dost
Kaafi accha likha hai
Or
Maza hi aa gya @Jst_Utkarsh

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