बूढ़ी मां

कल शाम मैं एक
रास्ते से गुजरी,
देखा वहाँ एक बूढ़ी माँ को
भूख से बिलखते हुए,
राहगीरों से एक वक्त्त का
भोजन मांगते हुए,
शायद निकाल फेंका होगा
उसके जालिम बेटों ने
उसे अपने ही घर से,
किसी काम की कहाँ रही
अब वो अपने लाचार हांथों से,
कसूर उस बेबस बूढ़ी माँ का
बस इतना सा ही था
कि सारी उमर उन बेटों का
संवारने में ही गुजरा था,
जिन हाथों ने बचपन में
उन्हें निवाले खिलाये,
जरुरत पे वो उन हाथों की
लाठी भी ना बन पाये।

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Sad truth. Well said. :heavy_heart_exclamation: @POOJA_BARNWAL

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Thanks a lottt

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That’s really awesome post
You penned it very nicely
Keep going friend @POOJA_BARNWAL :slightly_smiling_face:

Humans change so rapidly that it’s hard to understand what actually happened

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