औरत : 'त्याग की मूरत'

औरत : ‘त्याग की मूरत’…

उम्र 5 साल…
“मुझे भी भैया जैसे ट्रेन वाला खिलौना दिला दो ना।”
“तू क्या करेगी ट्रेन वाले खिलाने का, जा जो माँ ने गुड़िया बना के दी थी उसके साथ खेल।
तू तो मेरी समझदार बच्ची है ना।”

उम्र 10 साल…
“मुझे भी बड़े स्कूल में पढ़ने जाना है। भैया ने बताया कि उसके वहां बड़ी बड़ी कक्षाएं हैं, कंप्यूटर है, खेलने के लिए मैदान भी है।”
“स्कूल बड़ा या छोटा होने से कुछ नहीं होता। और वैसे भी जहां जा रही है वहां हमेशा अव्वल नंबर तो लाती है, और क्या चाहिए तुझे?
तू तो मेरी समझदार बच्ची हैं ना।”

उम्र 15 साल…
“मैं भी भैया के जैसे बाहर जाना चाहती हूं। मेरे परीक्षा रिजल्ट के हिसाब से मुझे मुंबई के एक बहुत बड़े यूनिवर्सिटी में दाखिला भी मिल रहा है।”
“कालेज तो यहां भी है ना, फिर क्या फायदा वहां जाने का? और फिर यहां रहेगी तो घर के कामकाज भी सीखेंगी।
तू तो मेरी समझदार बेटी है ना।”

उम्र 20 साल…
“मुझे अभी शादी नहीं करनी। मैं और पढ़ना चाहती हूं, कुछ बनना चाहती हूँ।”
“तेरा होने वाला पति पढ़ा लिखा है और उसे खुद एक पढ़ी-लिखी लड़की की तलाश थी, तो वह तुझे समझेगा भी और पढ़ाएगा भी। तू चिंता मत कर।
तू तो मेरी समझदार बेटी है ना।”

उम्र 21 साल…
“अब जब शादी को 6 महीने हो गए हैं और सब कुछ सामान्य भी हो गया है, तो अब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती हूँ।”
“मैं लाख रुपया प्रति महीने कमाता हूँ, तुम्हें किस चीज की कमी है जो और पढ़ना है, कुछ करना है। अब बस माँ, पापा और मैं ही तुम्हारी दुनिया हैं। तुम अपना सारा ध्यान घर संभालने में दो, अब बस यही तुम्हारा काम है।
तुम तो समझदार लड़की हो ना।”

उम्र 22 साल…
“डाक्टर, मुझे यह जानना है कि मेरे पेट में पल रहा बच्चा लड़का है या लड़की? अगर लड़की है तो मैं यह बच्चा नहीं चाहती।”
“क्या तुम्हें मालूम नहीं कि यह कानूनन अपराध है? तुम तो पढ़ी-लिखी मालूम पड़ती हो फिर ऐसा क्यों कह रही हो?”

“क्योंकि मैं एक समझदार औरत हूँ, डॉक्टर।
रोज तिल-तिल कर मरेगी इससे अच्छा इसे एक बार में ही मार दो।
जिंदगी में इतने त्याग करवाएंगे लोग इससे कि अंत में ना भावनाएं बचेंगी, ना इच्छाएं।
बचेगा तो बस एक शरीर मानो ‘पत्थर की मूरत’।”



मत बनाओ महान मुझे,
नहीं बनना भगवान मुझे।
समझो अपने समान मुझे,
रहने दो इंसान मुझे।।

                              ~S.Priya.
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I don’t know what to say after reading this. Heavy words come with heavy emotions. Such a backward world, we are living in. Listening and doing what is just told to be done without own consent and killing a child in the fear of having a life like this is never acceptable. If not anything, a piece of writing atleast bring some humanity in the inhumane behavior of this human world. Keep reaching people with your words. All the best. :pensive: @The_sheer_notions

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Thank you so much for the review…and support😊

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bahut hi khubsurati se likha hai aapne aur ek aurat ke jeevan ko shabdo me piroya hai… bahut khoob

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Thank you😊

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Pehle to is post ke liye ek salute tumhe
Bahut khoobsurati se likha hai or kya Gazab ka likha hai
Haan duniya thodi kharaab hai, Haan thodi bekar hai, par acche log bhi hamaare hi beech me hai
Kaash ladkiya bhi aazad Hoti, Kaash unke hath bhi takdeer Hoti,
Kaash ladkiya, alag na hoti :pensive:

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You have penned it very well… :metal:

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Yeah…:neutral_face::neutral_face:

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Thank you😅

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The age factor here was very well presented and then the thoughts progressing with it

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Thank you sir🙃

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Ovations n clapssss , such a touching write up with strong message to the society.

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