पहचान!

प्रतिमाओं की सीमा लांग दी थी उसने,
मेरी लिखी हुई कविताओं से ज़्यादा अपने आप को जान गई थी वो ,
फ़ासले कुछ नादन से थे
लेकिन फिर भी
मेरे इशारों को जान गई थी
वो ।

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bahut khoob, bahut khoob
bohot hard, bohot hard brother @Jupiter416

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Knowing a person results in such observation

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Thanks sir

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Shukriya sir .