ए वक़्त

ए वक़्त,
ज़रा ठहर जा…
चल रहा है किस ओर तु,
ज़रा तो सँभल जा।

खड़ी हूँ मैं भी ख्वाहिशों का घरौंदा लिए,
जरा मेरी भी सुन ले…
और अपनी भी सुनाता जा।

जरा रूकने की कोशिश तो कर,
मुझे सुनने की ख्वाहिश तो कर;
इतनी भी क्या है जल्दी जाने की…
जरा रुक, जरा मेरे पास तो ठहर।

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Those words :heart::heartpulse:

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great post again :slightly_smiling_face:

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